घुग्घुस :-घुग्घुस शहर में आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक अब केवल डर और परेशानी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सीधे–सीधे नागरिकों की जान के लिए खतरा बन चुका है। ताज़ा और बेहद शर्मनाक घटना नगर परिषद कार्यालय के ठीक पास सामने आई, जहाँ एक मासूम बच्चे को दिनांक 9 जनवरी शाम साढ़े चार बजे के दरमियान अपने ही घर के दरवाज़े पर खेलते समय आवारा कुत्ते के हमले का शिकार हो गया।
A 9-month-old baby was fatally attacked by a stray dog in front of his mother in the courtyard of his home.
घायल 9 महीने के बच्चे का नाम हमजा नौशाद राईन बताया जा रहा है, जो क्षेत्र के प्रसिद्ध नौशाद किराना के संचालक का पुत्र है। हैरानी की बात यह रही कि घटना के समय बच्चे की मां वहीं मौजूद थे कि अचानक एक आवारा कुत्ते ने पलक झपकते ही बच्चे पर झपट्टा मारा और उसे काट लिया। मां ने तत्काल साहस दिखाते हुए कुत्ते को भगाया और घायल बच्चे को तुरंत अस्पताल पहुँचाया, जिससे उसकी जान बच सकी।
पहले भी हो चुके हैं कई हमले
यह कोई पहली घटना नहीं है। शहर के विभिन्न इलाकों , रिहायशी क्षेत्रों, बाजार परिसरों, स्कूलों के आसपास और मुख्य सड़कों पर आवारा कुत्तों के हमलों की कई घटनाएँ पहले भी सामने आ चुकी हैं। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं में भय का माहौल है। शाम ढलते ही लोग अपने घरों से निकलने में डर महसूस कर रहे हैं।लोग अब नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे है।नगर परिषद कार्यालय के पास ही इस तरह की घटना होना परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। शहरवासियों का कहना है कि जब नगर परिषद अपने कार्यालय के आसपास भी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पा रही, तो पूरे शहर की जिम्मेदारी कैसे निभा रही है?
लोग सवाल पूछ रहे है कि
क्या शहर में आवारा कुत्तों की जिम्मेदारी किसी की नहीं?
नगराध्यक्ष, मुख्याधिकारी और नगर सेवक आखिर क्या कर रहे हैं?क्या नगर परिषद किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रही है? या फिर सिर्फ लोगों को गुमराह करने के लिए कागज़ों में योजनाएँ और ज़मीन पर नाकामी साफ नजर आ रही हैं।
नगर परिषद द्वारा पशु नियंत्रण, नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण जैसी योजनाएँ केवल कागज़ों तक ही सीमित नजर आ रही हैं। ज़मीनी हकीकत यह है कि शहर की गलियों और चौक-चौराहों पर कुत्तों के झुंड खुलेआम घूमते दिखाई दे रहे हैं। इससे साफ है कि निगरानी, योजना और अमल—तीनों स्तरों पर परिषद पूरी तरह विफल रही है।घुग्घुसवासियों ने नगर परिषद से तत्काल और ठोस कदम उठाने की माँग की है।लोगों का कहना है कि आपातकालीन आवारा कुत्ता नियंत्रण अभियान,वैज्ञानिक तरीके से नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण अनिवार्य ,स्थायी डॉग स्क्वॉड/रेस्क्यू टीम का गठन,
जिन इलाकों में हमले हो चुके हैं, वहाँ तत्काल निगरानी एवं कार्रवाई,लापरवाही बरतने के कारण यदि किसी की जान गई तो जिम्मेदार अधिकारियों पर गैर इरादतन हत्या भारतीय दंड संहिता (IPC) में मुख्य रूप से धारा 304 के तहत मामला दर्ज करने की मांग की जा रही हैं।
आज फिर एक मासूम बच्चा घायल हुआ है, कल किसी की जान भी जा सकती है। यदि नगर परिषद ने अब भी आंखें मूँदकर बैठी रही, तो जनता का आक्रोश सड़कों पर उतरना तय माना जा रहा है।
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