मूल ( नासीर खान):-
कांग्रेस का वर्चस्व वाली 20 सदस्यीय मूल नगर परिषद में उपाध्यक्ष पद पर कांग्रेस के गुटनेता राकेश रत्नावार का तथा गुलाबखां दिलदारखां पठाण और बंडू शशिकांत गुरनुले का नामनिर्देशित सदस्य पद पर आज निर्विरोध चयन किया गया.
Rakesh Ratnawar became the Vice President of Mool Nagar Parishad for the fifth time
नगर परिषद के उपाध्यक्ष एवं दो नामनिर्देशित सदस्यों के चुनाव के लिए नगराध्यक्ष एकता प्रशांत समर्थ की अध्यक्षता में आज नगर परिषद सभागृह में बैठक आयोजित की गई. इस अवसर पर निर्वाचन निर्णय अधिकारी के रूप में उपविभागीय अधिकारी अजय चरडे तथा मुख्याधिकारी संदीप दोडे उपस्थित थे.
हाल ही में संपन्न मूल नगर परिषद की सार्वत्रिक चुनाव में पूर्व मंत्री विधायक विजय वडेट्टीवार के मार्गदर्शन में तथा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव संतोषसिंह रावत के नेतृत्व में कांग्रेस ने 20 में से 18 सीटों पर विजय प्राप्त कर नगर परिषद पर एकछत्र सत्ता स्थापित की. भाजपा को मात्र दो सीटों पर संतोष करना पड़ा.
दो नामनिर्देशित सदस्यों के चयन के लिए गुटनेता राकेश रत्नावार ने मस्जिद ईदगाह कमेटी के उपाध्यक्ष तथा युवाशक्ति क्रीड़ा मंडल के कोषाध्यक्ष गुलाबखां दिलदारखां पठाण और आनंद विद्यालय तथा कनिष्ठ महाविद्यालय बेंबाळ के सेवानिवृत्त मुख्याध्यापक एवं ग्रामीण विकास प्रसारक मंडल के सचिव बंडू शशिकांत गुरनुले के नाम प्रस्तावित किए थे. इनके अलावा अन्य कोई नाम सामने न आने पर निर्वाचन अधिकारी अजय चरडे ने गुलाबखां पठाण और बंडू गुरनुले के नामों की नामनिर्देशित सदस्य के रूप में घोषणा की.
इन दोनों की नियुक्ति से नगर परिषद में कांग्रेस की संख्या अब 20 हो गई है.आज संपन्न नगर परिषद की पहली बैठक में भाजपा के दो सदस्यों सहित कांग्रेस के सभी 18 निर्वाचित सदस्य उपस्थित थे.
कई वर्षों बाद मूल नगर परिषद में मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति को कांग्रेस द्वारा प्रतिनिधित्व का अवसर दिए जाने पर मुस्लिम समाज के लोगों ने कांग्रेस नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया है.
22 वर्ष की आयु से राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय राकेश रत्नावार पांचवीं बार नगर परिषद के उपाध्यक्ष बने हैं. इससे पूर्व वे नगर परिषद की विभिन्न समितियों के सभापति रह चुके हैं और उल्लेखनीय कार्य कर चुके हैं. मजबूत जनसंपर्क वाले राकेश रत्नावार वर्तमान में मूल कृषि उत्पन्न बाजार समिति के सभापति के रूप में भी कार्यरत हैं.
दो नामनिर्देशित सदस्यों की नियुक्ति को लेकर कुछ माध्यमों द्वारा कांग्रेस के भीतर असंतोष फैलाने का प्रयास किया गया, लेकिन संतोषसिंह रावत की कुशल संगठन क्षमता के चलते यह प्रयास निष्फल साबित हुआ। यह विशेष उल्लेखनीय है.
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