जिला प्रतिनिधि | चंद्रपुर :-
बहुचर्चित किडनी खरीदी–बिक्री प्रकरण में जांच एजेंसियों को बड़ा वित्तीय सुराग मिला है। आरोपी दिल्ली निवासी डॉक्टर रवींद्रपाल सिंह के बैंक खाते में करीब 18 करोड़ रुपये के क्रेडिट और डेबिट ट्रांजेक्शन सामने आए हैं। पुलिस अब इन लेन-देन के स्रोत, उद्देश्य और संभावित हवाला कनेक्शन की बारीकी से जांच कर रही है।
Chandrapur Kidney Racket: ₹18 Crore Transactions in Dr. Singh’s Account, Bail Hearing on February 24
जमानत पर सुनवाई 24 फरवरी को
डॉ. सिंह ने मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में जमानत याचिका दाखिल की है। इस पर 18 फरवरी को सुनवाई प्रस्तावित थी, लेकिन दोनों पक्षों के दावे-प्रतिदावे के बाद अब अगली सुनवाई 24 फरवरी को तय की गई है।
अदालत ने डॉक्टर को 23 और 24 फरवरी को सुबह 10 से 12 बजे के बीच चंद्रपुर पुलिस के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले भी कोर्ट ने 11 से 17 फरवरी तक रोजाना हाजिरी लगाने का आदेश दिया था, जिसके तहत वे एसपी कार्यालय के समीप स्थित एलसीबी दफ्तर में उपस्थित होते रहे।
पूछताछ में टालमटोल, लिखित सवाल–जवाब
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान पुलिस ने हवाला से जुड़े संभावित पैसों और अन्य वित्तीय लेन-देन को लेकर मौखिक प्रश्न पूछे, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद पुलिस ने प्रश्न लिखित में दिए, जिनके जवाब भी लिखित रूप में लिए गए। यह दस्तावेज अब अदालत में पेश किए गए हैं।
थोटा एक्ट पर कानूनी बहस
हाईकोर्ट में बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि थोटा (Transplantation of Human Organs and Tissues Act) के तहत जांच के लिए सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारी की नियुक्ति आवश्यक है। इस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस अधीक्षक ने राज्य सरकार को पत्र भेजकर अधिकृत अधिकारी नियुक्त करने का अनुरोध किया।
सरकार ने किडनी प्रकरण की जांच के लिए गठित एसआईटी के प्रमुख अपर पुलिस अधीक्षक ईश्वर कातकडे को अधिकृत अधिकारी नियुक्त कर दिया है। इससे जांच को विधिक आधार और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
एक अन्य आरोपी अब भी फरार
मामले में तमिलनाडु के त्रिची निवासी डॉक्टर राजरत्नम गोविंदस्वामी अब भी फरार बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार उसका मोबाइल फोन स्विच ऑफ है और गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। हालांकि, स्थानीय स्तर पर अपेक्षित सहयोग न मिलने से कार्रवाई में कठिनाई आ रही है।
वित्तीय नेटवर्क की गहराई तक जांच
पुलिस अब 18 करोड़ रुपये के लेन-देन की कड़ी जोड़ने में जुटी है। जांच एजेंसियां बैंकिंग रिकॉर्ड, संभावित फर्जी खातों, मध्यस्थों और कथित हवाला नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में अन्य राज्यों से भी तार जुड़ने की आशंका है।
चंद्रपुर में सामने आए इस किडनी कांड ने स्वास्थ्य व्यवस्था और अंग प्रत्यारोपण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 24 फरवरी की सुनवाई और आगे की पुलिस कार्रवाई पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं।
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